Atomic Molecular theory – NCERT

Home |Atomic Molecular theory – NCERT

द्रव्य के अणुगति सिद्धान्त की विवेचना कीजिए।

Atomic Molecular theory

उत्तर: द्रव्य का अणुगति सिद्धान्त

आधुनिक गतिज आण्विक सिद्धान्त को परमाणु आण्विक सिद्धान्त (atomic molecular theory) भी कहते हैं । इस सिद्धान्त के निम्नलिखित आधार हैं

1- द्रव्य अत्यन्त सूक्ष्म कणों से मिलकर बना है तथा इन कणों को अणु कहते हैं । ये अणु एक या एक से अधिक परमाणुओं के संयोग से बनते हैं। तत्वों के अणु समान परमाणुओं से मिलकर बने होते हैं । यौगिकों के अणु असमान परमाणुओं से मिलकर बने होते हैं। एक ही शुद्ध पदार्थ के सभी अणु, सब प्रकार से गुणों में समान होते हैं । विभिन्न पदार्थों के अणु गुणों में भिन्न होते हैं।
पदार्थों के गुण-धर्म इस बात पर निर्भर करते हैं कि उनके अणु किस प्रकार के परमाणुओं से बने हैं और ये परमाणु, अणु में परस्पर किस प्रकार से बँधे हुए हैं ? उदाहरण के लिए-हीरा तथा ग्रेफाइट कार्बन के परमाणुओं से ही बने होते हैं, परन्तु आण्विक संरचना की विभिन्नता के कारण इन दोनों के भौतिक गुणों में अन्तर होता है।

Atomic Molecular theory
Atomic Molecular theory

2 – “द्रव्य में एक अणु से दूसरे अणु के बीच खाली स्थान रहता है, जिसे अन्त:-अणुक अवकाश (intermolecular space) कहते हैं।” इन खाली स्थानों को आँख द्वारा देख पाना असम्भव है, जिससे प्रत्येक पदार्थ सतत् (continuous) दिखाई देता है।
पदार्थ की भौतिक अवस्था बदलने के साथ-साथ अन्तः-अणुक स्थान भी घटता-बढ़ता रहता है । गैस अवस्था में यह स्थान सबसे अधिक होता है।

3 – “द्रव्य के अणुओं के बीच परस्पर आकर्षण एवं प्रतिकर्षण बल होता है। आकर्षण बल को अन्त:-अणुक आकर्षण (intermolecular attraction) या संसंजक बल (cohesive force) कहते हैं।” यह बल द्रव्य की भौतिक अवस्था में परिवर्तन के साथ परिवर्तित होता है
ठोस तथा द्रव अवस्था में अणुओं के बीच पर्याप्त अन्तरा-अणुक बल कार्य करता है, जबकि गैस अवस्था में अणुओं के बीच दूरी बहुत अधिक होती है, अतः अन्तरा-अणुक बल बहुत कम होता है।
ठोस एवं द्रव की अवस्था में, जब अणुओं की परस्पर दूरी साम्य दूरी ro से कम होती है, तब अणुओं के बीच प्रतिकर्षण बल (force of repulsion) आकर्षण बल की तुलना में अधिक होता है। इसके विपरीत, परस्पर दूरी के ro से
अधिक होने पर आकर्षण बल ,प्रतिकर्षण बल की तुलना में अधिक प्रभावी होता है।

4 – “द्रव्य के अणु सदैव इधर-उधर गतिशील रहते हैं । इस गति को आण्विक गति (molecular speed) कहा जाता है, जो अणुओं के भार तथा ताप पर निर्भर होती है।” अणुओं की गतिशीलता निम्नलिखित प्रेक्षणों से स्पष्ट होती है
(i) कमरे के एक कोने में इत्र की शीशी खोलने पर इसकी सुगन्ध पूरे कमरे में फैल जाती है ।
(ii) जल से भरी परखनली में पोटैशियम परमैंगनेट का एक क्रिस्टल डाल देने पर धीरे-धीरे सम्पूर्ण जल का रंग गुलाबी हो जाता

5 – रासायनिक अभिक्रियाओं में परमाणु न तो अपघटित होते हैं और न ही नष्ट होते हैं।

6 – रासायनिक अभिक्रियाओं में अभिकारक अणुओं के परमाणुओं की आन्तरिक व्यवस्था बदल जाने से नए अणु बन जाते हैं,जो अभिकारक अणुओं से गुणधर्मों में भिन्न होते हैं।

7 – अणुओं के द्रव्यमान तथा वेग के कारण उनमें गतिज ऊर्जा (kinetic energy) होती है । द्रव्य की ऊष्मीय ऊर्जा इसी गतिज ऊर्जा के कारण होती है । अणुओं का वेग शून्य होने पर द्रव्य का ताप भी शून्य हो जाता है।

8 – एक ही अणुसूत्र के कई अणु अलग-अलग संरचना के हो सकते हैं। संरचना में परिवर्तन के कारण इन अणुओं के गुणधर्म परस्पर भिन्न होते हैं।

9 – अणु अपने अवयवी परमाणुओं में टूट सकते हैं । अणुओं के टूटने से नए अणु बन जाते हैं जो पहले अणुओं से गुणों में भिन्न होते हैं। ( Atomic Molecular theory )

जल तथा ऐल्कोहॉल के निश्चित आयतन को मिश्रित करने पर मिश्रण का आयतन, प्रारम्भ में लिए गए जल तथा ऐल्कोहॉल के आयतनों के योग से कम हो जाता है, क्यों? (प्रयोग द्वारा स्पष्ट कीजिए।)

Atomic Molecular theory
Atomic Molecular theory

उत्तर : प्रयोग :

1- एक काँच की अंशांकित नली (graduated tube) लेते हैं।

2- इसके आधे भाग को जल से तथा शेष भाग को एथिल ऐल्कोहॉल से भर देते हैं ।

3- इसे अच्छी तरह से हिलाया जाता है ।

4- नली में कुछ रिक्त स्थान दिखलाई पड़ता है।

5- कुछ समय पश्चात हम देखते हैं कि मिश्रण का आयतन प्रारम्भ में लिए गए जल तथा ऐल्कोहॉल के आयतनों के योग से कुछ कम हो जाता है, क्योंकि ऐल्कोहॉल के अणु जल के अन्तरा-अणुक अवकाश (intermolecular space) के मध्य समायोजित हो जाते हैं। Atomic Molecular theory

Atomic Molecular theory

ये भी पढ़े….